मैलवेयर क्या है ? What is malware?

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मैलवेयर-एंड-इतस-टाइप

मैलवेयर का पूरा नाम मैलिसियस सॉफ्टवेयर है जो की हमारे कंप्यूटर, लैपटॉप और फ़ोन में  किसी एप्लीकेशन और सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करते समय आ जाता है |अगर एक बार मैलवेयर आप के कंप्यूटर सिस्टम  में एंटर  हो जाता  है तो यह आप के कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर को डैमेज कर देता है और आप के पर्सनल डाटा को भ चुरा सकता है। 

मैलवेयर बनाने का उद्देश्य है दूसरे के कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर को डैमेज या नुकसान पहुंचाना और किसी के इम्पोर्टेन्ट डाटा को चुराना और उसको डार्क वेब में जाके किसी दूसरे इंसान को बेच देना।   

मैलवेयर हमारे कंप्यूटर में कैसे आते हैं ?

  • हैकर द्वारा -कुछ मैलवेयर हैकर द्वारा बनाया जाता है जो की दूसरे के पर्सनल डाटा चुराने और अपने  खुद के फायदे के लिया बनाते है | 
  • वायरस ऑटोमेटिकली आपके कंप्यूटर में इंस्टॉल  हो जाते है जैसे की कोई  भी वेबसाइट में दिखाए जाने वाले ऐड को  बिना  रीड करे आप क्लिक कर देते हैं और किसी भी  अननोन वेबसाइट से वीडियो, पिक्चर, मूवी डाउनलोड करते समय भी मैलवेयर एंटर हो जाता है और आप को पता भी नहीं चलता की आप के  कंप्यूटर में कब वायरस एंटर कर गया |
  • पेन ड्राइव , मेमोरी कार्ड अपने कंप्यूटर सिस्टम में कनेक्ट करते समय भी मैलवेयर आने की ज्यादा तर संभावना बढ़ जाती है | अगर पहले से  ही उस पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड में मैलवेयर है तो भी आपके कंप्यूटर में मैलवेयर ऑटोमेटिकली आ जायेगा | 

क्रीपर वायरस 

दुनिया का पहला वायरस क्रीपर वायरस था जो की 1970 के दशक में आया था| ये वायरस इंटरनेट से पहले आया था | इसको थॉमस बॉब्स जो की एक कंप्यूटर इंजीनियर थे उनके  द्वारा बनाया गया था  | थॉमस बॉब्स ने इस वायरस को गलत इंटेंशन से नहीं बनाया था लेकिन ये वायरस  Arpanet (Advanced Research projects agency network )के द्वारा इंटरनेट में फ़ैल गया था | 

इस वायरस में स्क्रीन में एक मैसेज दिखाया जाता था “I am  the creeper catch me if you can” . यह वायरस एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में फ़ैल सकता था | 

मैलवेयर के प्रकार 

  •  वायरस Virus (vital information resources under siege)

वायरस एक इलेक्ट्रॉनिक कोड होता है जो हमारे कंप्यूटर में अवेलेबल फाइल को नुकसान पहुँचाता है और  ये हमारे कंप्यूटर के अंदर ऑपरेटिंग सिस्टम को धीरे-धीरे डैमेज करता  है | 

  • एडवेयर

एडवेयर एक मेलिसियस  सॉफ्टवेयर है | यह वायरस ज्यादा तर अननोन  वेबसाइट और ब्राउज़र के द्वारा आता है|जब आप कोई भी वेबसाइट ओपन करते है तो वहां पे साइड  में ऐड दिखाया जाता है | अगर आप किसी भी ऐड को गलती  से बिना रीड  करे उस ऐड पर क्लिक करते हैं तो आप के फ़ोन में एडवेयर वायरस आने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है |अगर आप के फ़ोन में एडवेयर पहले से  होगा तो आपका फ़ोन हैंग हो जाता है और स्क्रीन में प्रॉब्लम्स आती है |फ़ोन की स्पीड कम  हो जाती है। इसको सॉफ्टवेयर डेवलपर के द्वारा बनाया जाता है | 

  • स्पाईववेयर

स्पाइवेयर बेसीकली हैकर द्वारा बनाया जाता है जो दूसरे लोगों के पर्सनल डाटा को चुराने के लिए बनाया जाता है।हैकर उस पर्सनल इनफार्मेशन को बेच सकते हैं या फिर उस का मिसयूज कर सकते है | 

अगर आप किसी भी इन्फेक्टेड फाइल को डाउनलोड करते हैं जिसमे अलरेडी  वायरस है तो यह आप के  कंप्यूटर के लिया ख़तरनाक भी हो सकता है और अगर आप किसी अननोन वेबसाइट में गलती से क्लिक करते है तो वायरस आने की ज्यादा तर संभावना बढ़ जाता है| 

  • ट्रोजन वायरस 

ट्रोजन वायरस देखने में सॉफ्टवेयर की तरह दिखता है  लेकिन ये  फेक होता है | ये  हैकर दूसरे के कंप्यूटर को कंट्रोल करने के लिया और सॉफ्टवेयर को डैमेज करने के लिए  यूज़ किया जाता है | इससे  भी पर्सनल और इम्पोर्टेन्ट डाटा चुराने के लिए  बनाया गया है।

लक्षण 

अगर आपके कंप्यूटर में कोई भी  मैलवेयर एंटर हुआ होगा तो आपके कंप्यूटर का इंटरनेट स्लो हो जाता है और आपके  फ़ोन के स्पीड कम हो जाती है| आप कोई भी वेबसाइट या ऐप ओपन करते हो तो एरर दिखता  है। स्क्रीन ब्लैंक और आपका फ़ोन ऑटोमेटिकली बंद  हो जाता है।

मैलवेयर को आपके कंप्यूटर फ़ोन या लैपटॉप में आने से कैसे  रोके ?

  • आप कंप्यूटर, फ़ोन, या लैपटॉप  में एक एंटीवायरस ऐप इनस्टॉल कर सकते है  और टाइम टू  टाइम उसको अपडेट करवाना पड़ेगा| 
  • किसी भी अननोन वेबसाइट से वीडियो, पिक्चर और मूवी डाउनलोड न करे |

उम्मीद है आपको मालवारे के बारे में सही जानकारी मिल गयी होगी। अगर आपको अर्तिक्ल अच्छा  लगा तो शेयर कीजिये। आप अपने सुझाव भी हमें कमेंट में भेज सकते हैं। 

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