बुद्धि और विद्या के देवता भगवान् श्री गणेश अपनी तेज़ बुद्धि का प्रयोग कर किसी भी विषय को समझने के लिए उसकी तह तक जाते हैं | देवताओ में प्रथम पूजनीय भगवाम श्री गणेश ने अपना वाहन मूषक ही क्यों चुना | आइए जानते हैं इसके पीछे की कुछ रोचक कथाएं |
मूषक एक संस्कृत शब्द है| मूषक शब्द का अर्थ लूटना या चुराना होता है | ऐसा माना जाता है की मनुष्य का दिमाग मूषक, चुराने वाले यानि चूहे जैसा होता है | वैज्ञानिकों का मानना है की मनुष्य और चूहे के दिमाग का आकार एक सामान होता है | चूहे और मनुष्य का सम्बन्ध कहीं न कहीं है | भगवान् गणेश जी का अपना वाहन चूहा बनाना इस बात का संकेत है की उन्होंने स्वार्थ पर विजय प्राप्त कर जनकल्याण के भाव को अपने भीतर जागृत किया है |
सभी भगवानो के अपने -अपने वाहन होते हैं जिनके अपनी अपनी खासियत है | इसी प्रकार भगवान् श्री गणेश के वाहन मूषक ही क्यों हैं | ऐसी क्या खासियत है जिसकी वजह से मूषक को शिव पुत्र श्री गणेश ने अपना वाहन स्वीकार किया | आइए जानते हैं इसके पीछे की रहस्य को –
पहली कथा –
एक पौराणिक कथा के अनुसार | एक गजमुखासुर नामक दैत्य था जिसको वरदान मिला हुआ था की वह किसी शास्त्र से नहीं मर सकता | उसने अपने बल से सभी देवताओं को परेशान किया हुआ था | एक दिन सभी देवता गजमुखासुर से परेशान होकर भगवान् श्री गणेश के पास सहायता के लिए पहुंचे| श्री गणेश ने गजमुखासुर से युद्ध करने का निर्णय लिया |
फिर भगवान् श्री गणेश और गजमुखसुर का भयंकर युद्ध हुआ | युद्ध के दौरान भगवान् श्री गणेश का एक दांत टूट गया | श्री गणेश क्रोध में आकर उस दांत से गजमुखासुर पर प्रहार करने लगे | गजमुखासुर यह देख कर घबरा गया और चूहे का रूप धारण कर वहां से भागने लगा | लेकिन भगवान् श्री गणेश ने अपने पाश से गजमुखासुर को बांध लिया | मृत्यु के भय के कारण गजमुखसुर ने श्री गणेश से माफ़ी मांगी | तभी श्री गणेश ने गजमुखासुर को अपना वाहन बना कर एक नया जीवन दान दिया |
दूसरी कथा-
एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान् श्री गणेश का वाहन मूषक पूर्वजन्म में राजा इंद्र के दरबार में गन्धर्व था जिसका नाम क्रोंच था | एक बार इंद्र की सभा में किसी गंभीर विषय पर चर्चा चल रही थी | तभी गलती से क्रोंच का पैर मुनिदेव पर पड़ गया | मुनिदेव को लगा की यह क्रोंच की शरारत हैं | मुनिदेव ने क्रोध में आकर क्रोंच को चूहे बनने का श्राप दिया | परन्तु क्रोंच एक विशाल चूहा बन गया | वह इतना विशाल था की रास्ते में आने वाले पेड़ , छाड़ को आसानी से नष्ट कर देता था |
एक बार वह उधम मचाते हुए महर्षि पराशर के आश्रम पहुँच गया | वहां पहुँच कर वह तोड़ फोड़ मचाने लगा | ऋषियों के वस्त्रो को कूतर दिया | महर्षि पराशर परेशान होकर भगवान् श्री गणेश की स्तुति करने लगे | गणेश महर्षि से प्रसन्न होकर वहां चूहे को पकड़ने पहुँचे श्री गणेश ने अपना पाश फेंका पाश चूहे का पीछा करते हुए पाताल लोक पहुँच गया और चूहे को बांधकर श्री गणेश के सामने रख दिया |
मूषक श्री गणेश को देख माफी मांगने लगा | भगवान् श्री गणेश ने कहा तुमने महर्षि पराशर को बहुत परेशान किया है | परन्तु अब तुम मेरी शरण में हो तुम्हे जो वरदान माँगना है मांग सकते हो | यह सुन मूषक ने अपने अहंकारवश से कहा मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए परन्तु आपको मुझसे कुछ माँगना हैं तो आप मांग सकते है |
भगवान् श्री गणेश मुस्कुराते हुए बोले तो ठीक हैं तुम मेरे वाहन बन जाओ | यह सुन मूषक हैरान हो गया | उसको अपने अहंकार और अभिमान के कारण श्री गणेश का वाहन बनना पड़ा | जब गणेश जी मूषक पर सवार हुए तो उनके भार से मूषक नीचे दबा जा रहा था मूषक के प्राण संकट में आ गए | मूषक बोले हे प्रभु अपने वाहन पर कृपा करो | श्री गणेश ने अपना भार काम किया और इस प्रकार मूषक के अहंकार को तोड़ कर उसको अपना वाहन बना लिया |
तो इन रोचक कथाओं से पता चलता हैं की क्यों मूषक भगवान् श्री गणेश के वाहन हैं |

